मिल्लिया सर सैयद प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, रामबाग पूर्णिया में उपस्थिति नियमों की अनदेखी, छात्रों का भविष्य संकट में

पूर्णिया (बिहार): मिल्लिया सर सैयद प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, रामबाग, पूर्णिया में उपस्थिति नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रशासन SCERT और बिहार बोर्ड के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना कर रहा है और अनुपस्थित छात्रों को भी परीक्षा फ़ॉर्म भरने की अनुमति दे रहा है।

📌 मामला क्या है?

कॉलेज में कुल 100 छात्र नामांकित हैं, लेकिन प्रतिदिन मात्र 20–25 छात्र ही कक्षाओं में उपस्थित रहते हैं। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन सभी छात्रों से फ़ीस लेकर परीक्षा फ़ॉर्म भरवा लेता है।

छात्रों का कहना है कि यह नियमों का खुला उल्लंघन है क्योंकि SCERT ने 100% उपस्थिति अनिवार्य की है।

⚖️ नियम क्या कहते हैं?

SCERT और NCTE के दिशा-निर्देश के अनुसार—

  • न्यूनतम उपस्थिति 80% से 100% तक अनिवार्य है।
  • अनुपस्थित छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं है।
  • कॉलेज को उपस्थिति रजिस्टर, बायोमेट्रिक मशीन और गेट पास एंट्री का रिकॉर्ड रखना ज़रूरी है।

इसके बावजूद अनुपस्थित छात्रों को फ़ॉर्म भरने की अनुमति देना सीधा नियम उल्लंघन और संभावित भ्रष्टाचार है।


😔 नियमित छात्रों का दर्द

नियमित छात्रों का कहना है कि उनकी मेहनत और उपस्थिति का कोई महत्व नहीं रह गया है।

“हम रोज़ कॉलेज आते हैं, क्लास में बैठते हैं, पढ़ाई करते हैं। लेकिन जब परीक्षा की बारी आती है तो वे छात्र भी फ़ॉर्म भर देते हैं जो पूरे साल कॉलेज में दिखाई ही नहीं दिए। इससे हमारे मनोबल पर असर पड़ता है।”
— एक छात्र (नाम न छापने की शर्त पर)


📢 छात्रों के आरोप

छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर निम्नलिखित आरोप लगाए:

  • उपस्थिति रजिस्टर और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की अनदेखी।
  • अनुपस्थित छात्रों से फ़ीस लेकर फ़ॉर्म भरवाना।
  • SCERT और बोर्ड के नियमों का उल्लंघन।
  • भ्रष्टाचार और लापरवाही।

🗣️ छात्रों की मांग

छात्रों ने SCERT और बिहार बोर्ड से तत्काल कार्रवाई की मांग की है:

  1. कॉलेज का उपस्थिति रजिस्टर, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और गेट पास एंट्री की जाँच कराई जाए।
  2. केवल उन्हीं छात्रों को परीक्षा फ़ॉर्म भरने की अनुमति दी जाए जिनकी उपस्थिति नियमों के अनुसार है।
  3. दोषी प्राचार्य और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
  4. भविष्य में सभी निजी कॉलेजों की निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था मज़बूत की जाए।

शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे मामले जारी रहे तो शिक्षा की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होगी।

“प्रशिक्षण कॉलेजों का मकसद योग्य और ईमानदार शिक्षक तैयार करना है। लेकिन अगर छात्र बिना क्लास अटेंड किए ही पास हो जाते हैं, तो वे भविष्य में कैसे शिक्षक बनेंगे? यह पूरे शिक्षा तंत्र को प्रभावित करेगा।”
— एक स्थानीय शिक्षाविद

RTI और शिकायतें

कुछ छात्रों ने RTI (सूचना का अधिकार) के ज़रिए भी जानकारी माँगी है, जिसमें उपस्थिति प्रतिशत, परीक्षा प्रक्रिया और कॉलेज का आधिकारिक उपस्थिति रजिस्टर माँगा गया है।

🏛️ प्रशासन की चुप्पी

अब तक कॉलेज प्रशासन ने इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन छात्रों का कहना है कि अगर उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की गई तो वे SCERT और NCTE तक अपनी शिकायत ले जाएंगे।

“हमारे कॉलेज में 100 छात्र नामांकित हैं लेकिन रोज़ 20–25 ही क्लास में आते हैं। बाकियों से सिर्फ जुर्माना/पैसा लेकर फ़ॉर्म भरवा लिया जाता है। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है बल्कि हमारे जैसे नियमित छात्रों के साथ नाइंसाफी भी है।”
— प्रिन्स कुमार, छात्र

✊ निष्कर्ष

मिल्लिया सर सैयद प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, पूर्णिया में उठाया गया मुद्दा केवल एक संस्थान का नहीं, बल्कि पूरे बिहार के शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों के लिए चेतावनी है।

यदि नियमों की अनदेखी होती रही तो मेहनती छात्रों का भविष्य अंधकारमय होगा और शिक्षा की गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ेगा।
अब ज़िम्मेदारी SCERT और बिहार बोर्ड की है कि वे जल्द से जल्द कार्रवाई कर छात्रों को न्याय दिलाएँ।

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